सड़क चौड़ी करने के नाम पर वर्षों पुराने पेड़ों का कत्ल विकास नहीं : प्रमिला रावत
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल की वरिष्ठ नेता प्रमिला रावत ने आज कहा कि जब हमारी गौरा देवी वीरांगना पेड़ों से चिपक गई थीं, तब अंग्रेजों को भी आरी रोकनी पड़ी थी। पर्यावरणविद् गौरा देवी द्वारा चिपको आंदोलन की ऐतिहासिक शुरुआत 26 मार्च 1974 को की गई थी। उत्तराखंड के चमोली ज़िले के रैणी गाँव की महिलाओं ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया था।लेकिन आज अपने ही देश, अपने ही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 15000 पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है।
प्रमिला रावत ने कहा कि अगर सच में सरकार को विकास चाहिए, तो जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया जाए, पहाड़ों में अस्पताल बनाएं, बेहतर शिक्षा व्यवस्था प्रदान की जाए। केवल सड़क चौड़ी करने के नाम पर वर्षों पुराने पेड़ों का कत्ल विकास नहीं है।
अब वक्त आ गया है जब उत्तराखंड में निवास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को घरों से बाहर निकल कर इन 15000 पेड़ों को बचाने की आवाज़ बुलंद करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस को आगे कर रहीं हैं लेकिन यह लड़ाई जारी रहेगी।
